Maharashtra State Board Class 9 Hindi Lokvani Solutions Chapter 3 निज भाषा (पठनार्थ)
Hindi Lokvani 9th Std Digest Chapter 3 निज भाषा Textbook Questions and Answers
1. भाषा बिंदु:
2. मौलिक सृजन :
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ इस कश्चन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
i. निज भाषा ……………………….. हिय को सूल।। उत्तर: कवि कहते हैं कि अपनी भाषा अर्थात मातृभाषा की उन्नति के द्वारा ही प्रगति संभव है, क्योंकि सारी उन्नतियों का आधार यही है। अपनी भाषा के ज्ञान बिना हृदय की पीड़ा का निवारण संभव नहीं हैं।
ii. अंग्रेजी पढ़ि………………….. हीन के हीन।। 3. संभाषणीय :
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
हिंदी दिवस’ समारोह के अवसर पर अपने वक्तृत्व में हिंदी भाषा का महत्त्व प्रस्तुत कीजिए। उत्तर : मानवीय सभापति महोदय, प्रधानाचार्य जी, मंच उपस्थित अतिथि गण, गुरुजन व मेरे प्यारे साथियों, आज हम सभी यहाँ हिंदी समारोह मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। इस शुभ अवसर पर मैं हिंदी भाषा के महत्त्व के विषय में कुछ कहना चाहूँगा। हिंदी हमारी राजभाषा है। स्वतंत्र भारत के संविधान में हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। हिंदी बहुत पहले से देश की संपर्क भाषा रही है। प्रत्येक राष्ट्र अपनी राष्ट्रभाषा के विषय में सजग, सतर्क और संवेदनशील होते हैं, क्योंकि राष्ट्रभाषा देश की एकता, अखंडता उसकी संस्कृति की पहचान होती है। |
देश की आजादी की लड़ाई में हिंदी भी एक हथियार बन गई थी। देश के नेता हिंदी में भाषण देते थे और लोगों में अद्भुत जागृति पैदा करते थे। महात्मा गांधी देश के गाँव-गाँव में जाकर हिंदी में ही जनता को संबोधित करते थे। आज देश के हर भाग में हिंदी बोली जाती है। हिंदी अखबार और पत्र-पत्रिकाओं का भी देश में चारों तरफ बहुत प्रचार-प्रसार है। हिंदी एक समृद्ध भाषा है। इस भाषा में देश की मिट्टी की महक है। इसका साहित्य बहुत ऊँचे दर्जे का है।
हिंदी आज विश्व के लगभग ७५ देशों के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। हिंदी को विश्व में सर्वाधिक फिल्में बनती हैं। सैटलाईट के विदेशी चैनल भी हिंदी माध्यम को अनवरत अपनाते चले जा रहे हैं। हमारे अहिंदी भाषी प्रांतों में भी हिंदी द्वितीय भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही है। प्रथम भाषा के रूप में जब उसे संपूर्ण देश में मान्यता प्राप्त होगी, तभी हमारी हिंदी के प्रति सच्ची श्रद्धा मानी जाएगी।
4. लेखनीय :
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
‘अपने विद्यालय में मनाए गए ‘बाल दिवस’ का वर्णन लिखिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
चाचा नेहरू के जन्मदिन पर मनाया जाने वाला ‘बाल-दिवस’ समारोह आज प्रात: ठीक 9 बजे हमारे विद्यालय में मनाया गया। इस समारोह में कक्षा 10 तक के छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर अध्यक्ष थे, सुप्रसिद्ध भजन गायक ‘अनूप जलोटाजी’। उनके आते ही विद्यार्थियों की करतल ध्वनि से सारा हाल गूंज उठा। अध्यक्ष ने मंच पर आते ही सरस्वती जी के फोटो को हार पहनाया व तत्पश्चात पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को हार पहनाया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. विजय-प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथी का स्वागत किया एवं उपस्थित लोगों से उनका परिचय कराया। छात्र-छात्राओं ने इस शुभ अवसर पर चाचा नेहरू के जीवन की प्रमुख घटनाओं पर एक लघु नाटक प्रस्तुत किया। बाद में मुख्य अतिथि का भाषण हुआ। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने विद्यार्थियों को उच्च लक्ष्य की ओर प्रेरित किया। अंततोगत्वा प्रधानाचार्य डॉ. विजय-प्रताप सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगीत के समूहगान के साथ ही सगरोह की समाप्ति हुई। Hindi Lokvani 9th Std Textbook Solutions Chapter 3 निज भाषा Additional Important Questions and Answers (क) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति क (1) : आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
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संजाल पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 3
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए। i. निज भाषा “अहै, सब उन्नति को मूल। ii. पै निज भाषा ….बिन, रहत हीन के हीन।।
Solution & Step-by-Step Answer:
i. उन्नति ii. ज्ञान
(ख) पद्यांश पड़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति ख (1): आकलन कृति
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए। उत्तर |


प्रश्न 2
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पद्यांश के आधार पर विधान पूर्ण कीजिए। i. लाख उपाय अनेक यो, ii. इक भाषा हक जीव, इक मति
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
i. लाख उपाय अनेक यों, भले करे किन कोय। ii. इक भाषा इक जीव, इक मति सब घर के लोग।
कृति ख (2) : सरल अर्थ
प्रश्न 1
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नीचे दी हुई पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। i. उन्नति पूरी है ………….. मूढ़ सब कोय।।
Solution & Step-by-Step Answer:
कवि कहते हैं कि किसी देश या समाज की संपूर्ण प्रगति तभी होती जब उसके घर की प्रगति होती है अर्थात घर की भाषा (मातृभाषा) की उन्नति होती है। सिर्फ अपने शरीर की अर्थात स्वयं की उन्नति करने से सब लोग अज्ञानी ही बने रहते हैं।
ii. निज भाषा ………………… करे किन कोय।। (ग) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति ग (1) : आकलन कृति
प्रश्न 1
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आकृति पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
पद्यांश के आधार पर विधान पूर्ण कीजिए। i. निजभाषा में कीजिए, ii. यह गुन भाषा और मह, ……….
Solution & Step-by-Step Answer:
i. निजभाषा में कीजिए, जो विद्या की बात। ii. यह गुन भाषा और मह, कबहूँ नाहीं होय।
कृति ग (2) : सरल अर्थ
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
नीचे दी हुई पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। i. और एक ………………………. कबहूँ नाहीं होय।।
Solution & Step-by-Step Answer:
कवि कहते हैं कि यदि ज्ञान की बात अपनी भाषा में करते हैं तो एक और भी लाभ स्पष्ट दिखाई देता है जो भी कोई अपनी भाषा की बात को सुनता है, वह लाभान्वित होता है। यह गुण अर्थात यह विशेषता किसी अन्य भाषा में कभी भी नहीं हो सकती। अन्य भाषा में की गई बात को हम पूरी तरह नहीं समझ पाते इसलिए उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।
(घ) पद्यांश पढ़कर दी गई सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए। कृति घ (1) : आकलन कृति
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
चौखट पूर्ण कीजिए।
Solution & Step-by-Step Answer:
प्रश्न 2
Maharashtra Board Solution
उचित पर्याय चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए। i. विविध कला शिक्षा अमित (क) भाषा विविध लखात (ख) ज्ञान अनेक प्रकार उत्तर : (ख) ज्ञान अनेक प्रकार |
ii. भारत में सब भिन्न अति ………..
(क) भाषा माँहि प्रचार
(ख) ताही सों उत्पात
उत्तर :
(ख) ताही सों उत्पात
कृति घ (2) : सरल अर्थ
प्रश्न 1
Maharashtra Board Solution
नीचे दी हुई पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। i. विविध कला …………………… भाषा माँहि प्रचार।।
Solution & Step-by-Step Answer:
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Solution & Step-by-Step Answer:
कवि कहते हैं कि अनेक प्रकार की कलाएं, असीमित शिक्षा तथा विभिन्न प्रकार का ज्ञान सभी देशों से अवश्य लेना चाहिए। लेकिन उस कला, शिक्षा तथा ज्ञान का प्रचार-प्रसार अपनी मातृभाषा में ही करना चाहिए क्योंकि इसके फलस्वरूप अधिक से-अधिक लोग इन विषयों द्वारा लाभ उठा सकेंगे।
ii. भारत में सब ……………….. भाषा विविध लखात।। निज भाषा Summary in Hindi कवि-परिचय : जीवन-परिचय : भारतेंदु हरिश्चंद्र साहित्य के पितामह कहे जाते हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। इन्हें ‘खड़ी बोली का जनक’ कहा जाता है। इन्होंने कविता, नाटक, निबंध, व्याख्यान आदि का लेखन किया। पद्य-परिचय : गीत : यह अर्थ सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते है। सम चरणों के अंत में एक गुरू और एक लघु मात्रा होती है। सारांश : कवि कहते है कि अपनी भाषा की उन्नति से ही सभी प्रकार की उन्नति संभव है। अपनी भाषा के संपूर्ण ज्ञान के अभाव में व्यक्ति हीन हो जाता है। अपनी भाषा के उन्नति के बिना लाख उपाय करने पर भी व्यक्ति उन्नति नहीं कर पाता। जिस घर में सबकी भाषा एक हो, सबके विचार एक हो तथा आपस में कोई भेदभाव न हो उस घर से दुःख हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। हमें विभिन्न देशों से उनकी कला, शिक्षा तथा ज्ञान अवश्य लेना चाहिए परंतु उसका प्रचार-प्रसार अपनी भाषा में करना चाहिए। क्योंकि इससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। देश में भाषा की भिन्नता के कारण ही आपसी दंगे-फसाद होते हैं। अतः हमें अपनी भाषा की उन्नति करनी चाहिए। सरल अर्थ : निज भाषा …………………. हिय को सूल।। अंग्रेजी पढ़ि ………………………हीन के हीन।। उन्नति पूरी है ……………………….. मूढ सब कोय।। निज भाषा …………………………… करे किन कोय।।। इक भाषा ………………………… मूड़ता सोग।। और एक …………………………….. कबहूँ नाहीं होय।। विविध कला …………………………… भाषा माहि प्रचार।। भारत में सब ………………….. भाषा विविध लखात।। शब्दार्थ : |



